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नेहरू युवा केंद्र संगठन द्वारा बनाए गए युवा मण्डल की सम्पूर्ण जानकारी

युवा मंडल
युवा मंडल आन्दोलन – एक रचनात्मक युवा पहल
जानिए सक्रिय युवा मंडल के बारे में

युवा मंडल 15 से 29 वर्ष आयु समूह के युवक/युवतियों का ऐसा संगठन है जो स्वैच्छिक रुप से सामुदायिक गतिविधियों में सहभागी बनना चाहता है। युवा मंडल सदस्य न केवल स्वयं जागरुक एवं जिम्मेदार नागरिक बनना चाहते हैं अपितु अपनी जागरुकता एवं रचनात्मक शक्ति का प्रयोग समाज एवं राष्ट्र के नवनिर्माण में करना चाहते हैं। युवा मंडल रचनात्मक ऊर्जा से भरपूर ऐसे युवाओं का समूह है जिसके मन में गांव एवं समाज की उन्नति की उत्कट भावना भरी हुई है साथ ही जिसके मन में सेवा कार्यों के बदले में कुछ प्राप्ति की आशा नहीं हैं। उसकी सेवा पूर्णतः निःस्वार्थ है। नेहरु युवा केन्द्र समस्त युवाओं से अपील करता है कि युवा मण्डल आन्दोलन के सक्रिय सदस्य बनकर सार्वजनिक जीवन में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें।

सक्रिय युवा/महिला मण्डल में कम से कम 20 सदस्य होना चाहिए। सर्वप्रथम 15 से 29 वर्ष आयु समूह के सभी युवा एकत्रित होकर युवा मण्डल गठन की प्रक्रिया प्रजातांत्रिक पद्धति से पूर्ण करें। युवा मण्डल में ग्राम के समस्त वर्गों का प्रतिनिधित्व होना चाहिए। युवा मण्डल की सदस्यता सभी के लिये खुली रहना चाहिए। प्रयास होना चाहिए कि मण्डल के गठन एवं पदाधिकारियों के चुनाव में सभी की सहमति हो।
युवा/महिला मण्डल का गठन निःस्वार्थ भाव से समाजसेवा के लिए किया जाता है। युवा मण्डल की सदस्यता लेते समय प्रत्येक युवा को यह जानकारी दी जानी चाहिए।
युवा/महिला मण्डल गठन के तुरंत बाद नेहरु युवा केन्द्र से संबद्धता के लिये आवेदन किया जाना चाहिए। संबद्धता हेतु कार्यालय में स्वयं आकर अथवा राष्ट्रीय युवा कोर स्वयंसेवक के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है। संबद्धता हेतु ूूूण्दलोण्वतह वेबसाईड पर आॅनाईन आवेदन भी किया जा सकता है।
युवा/महिला मण्डल की बैठक कर युवा मण्डल संचालन हेतु नियम कायदे तय किये जाना चाहिये। साथ ही सदस्यता के लिये सबको स्वीकार्य मासिक/वार्षिक शुल्क भी रखा जाना चाहिये। शुल्क से प्राप्त राशि बैंक में युवा मण्डल के नाम खाता खोलकर जमा की जाना चाहिये। इस राशि का उपयोग मण्डल द्वारा आयोजित कार्यक्रमों के लिये किया जाना चाहिये।
युवा/महिला मण्डल को शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त हो सके इसके लिए सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत मण्डल का पंजीयन अवश्य करना चाहिये। पंजीयन का कार्य कार्यालय रजिस्ट्रार फम्र्स एण्ड सोसायटी द्वारा किया जाता है। नेहरु युवा केन्द्र के माध्यम से पंजीयन करवाने पर पंजीयन शुल्क में छूट दी जाती है। इस संबंध में कठिनाई होने पर नेहरु युवा केन्द्र कार्यालय में संपर्क करें।
क्या हो युवा मण्डल की कार्य योजना

युवा/महिला मण्डलों को अपनी वार्षिक कार्ययोजना अवश्य बनाना चाहिये, एवं प्रयास करना चाहिये कि कार्ययोजना के अनुसार वर्षभर कार्यक्रमों का आयोजन हो। कार्ययोजना के अंतर्गत युवा/महिला मण्डल के वार्षिक चुनाव, महत्वपूर्ण दिवस एवं सप्ताहों का आयोजन, खेलकूद की गतिविधियां, स्थानीय महत्व के त्यौहारों के आयोजन में सहयोग आदि कार्यक्रम रखे जा सकते हैं।

कुछ विषय यहां सुझाये जा रहे हैं जिन्हें कार्ययोजना में अवश्य शामिल किया जाना चाहिए। इनके माध्यम से सामाजिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव लाये जा सकते हैं।

माह में कम से कम 02 बार युवा/महिला मण्डल की बैठक आयोजित की जानी चाहिए। इन बैठकों में युवा मण्डल की कार्ययोजना एवं ग्राम की उन समस्याओं/कार्यों की चर्चा होनी चाहिए जिनमें युवा मण्डल सदस्य सहभागिता कर सकते हैं। इन बैठकों की कार्यवाही एक रजिस्टर में दर्ज की जानी चाहिए।
ग्राम सभा ग्राम विकास की योजनायें बनाने एवं उनके अनुमोदन का महत्वपूर्ण मंच है। तीन स्तरीय पंचायत राज व्यवस्था का यह सबसे महत्वपूर्ण मंच है। देखने में आता है कि ग्रामीण, ग्राम सभाओं के आयोजन में विशेष रुचि नहीं लेते हैं। युवा/महिला मण्डल को चाहिये कि वह निर्धारित समय पर ग्राम सभाओं का आयोजन करवाये एवं आवश्यकता पड़ने पर विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन करवाये। ग्रामीणों में यह भावना पैदा करना आवश्यक है कि ग्रामसभा के आयोजन की जिम्मेदारी केवल निर्वाचित प्रतिनिधियों की नहीं अपितु यह ग्राम सभा के सभी सदस्यों की है।
नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरुकता

युवा/महिला मण्डल के सदस्यों को चाहिये कि नागरिक कर्तव्यों के प्रति न सिर्फ स्वयं जागरुक हों अपितु समस्त ग्रामवासियों को नागरिक कर्तव्यों के प्रति सचेत करें। इसके लिये स्कूलों एवं ग्राम सभाओं में आवश्यक रुप से चर्चा करें। लोगों को बतायें कि कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही के कारण अनेक समस्यायें जन्म लेती हैं। कर्तव्यों के प्रति निरंतर उदासीनता के चलते समस्यायें बड़ी होती जाती हैं। यह बताया जाना भी आवश्यक है कि सार्वजनिक हितों से जुड़े हुए सभी कार्य करना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं अपितु हम सबका कर्तव्य है। सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी कार्यक्रम तभी सफल होंगे जब उनके क्रियान्वयन में समाज की भागीदारी होगी। मूक दर्शक नहीं, सक्रिय नागरिक बनकर राष्ट्र के विकास में सहभागी बनें।

सामाजिक समस्याओं का समाधान

हर क्षेत्र में प्रगति होने के बावजूद सामाजिक समस्यायें अभी भी मौजूद हैं। जाति प्रथा, छूआछुत, अंधविश्वास, दहेज प्रथा, बालविवाह आदि समस्यायें अभी भी समाज में देखने को मिलती हैं। यह समस्यायें राष्ट्र के विकास में बाधक हैं। युवाओं को आगे आकर इन समस्याओं के समाधान में अपनी प्रभावी भूमिका का निवर्हन करना चाहिए। नशाखोरी आज की एक प्रमुख समस्या है। स्कूली छात्रों से लगाकर हर उम्र के व्यक्ति इसकी चपेट में हैं। नशाखोरी से समाज में कई विकृतियां पैदा होती हैं। युवा/महिला मण्डलों को प्रयास करना चाहिये कि सभी प्रकार की नशाखोरी के खिलाफ अभियान चलायें एवं स्वस्थ समाज के निर्माण में अपना योगदान दें।

पर्यावरण संरक्षण

पर्यावरण को संरक्षित करने का कार्य मूलतः समाज का है। जल, जंगल, जमीन, पशु, पक्षी, इन सबका संरक्षण हमारा दायित्व है। इसीलिये नदियों, वृक्षों, पहाड़ों एवं जानवरों को अत्यंत प्राचीनकाल से हमारे यहां पूजा जाता है। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में यह कार्य किए जा सकते हैं।

कृषि में कीटनाशकों एवं रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग के खिलाफ ग्रामीणों को जागरुक करें।
वृक्षारोपण कर उनकी साज-संभाल की जिम्मेदारी लें। वर्षाकाल में अपने-आप पैदा होने वाले आम, नीम जामुन आदि के पौधों का इस्तेमाल इस काम में हो सकता है।
वृक्षों की कटाई को रोकें।
जलस्त्रोतों की सफाई रखें। नदियों, तालाबों, कुंओं में विसर्जन सामग्री अथवा अन्य अपशिष्ट न डालें।
पाॅलिथीन और प्लास्टिक की अनुपयोगी सामग्री को यहां-वहां फेंकने की बजाय उनका उचित निस्तारण करें। पाॅलिथीन के उपयोग को हतोत्साहित करें।
पर्यावरण के मित्र जीव-जन्तुओं को संरक्षण प्रदान करें।
पैट्रोलियम पदार्थों के बेजा इस्तेमाल से होने वाले प्रदूषण को हतोत्साहित करें।
ऊर्जा संरक्षण

जैसे-जैसे भौतिक प्रगति हो रही है, ऊर्जा की मांग भी बढ़ रही है। ऊर्जा के दोनों प्रमुख श्रोत बिजली और तेल की उपलब्धता पर मांग का दबाव बढ़ता जा रहा है। ऐसे में युवा मण्डलों द्वारा ऊर्जा संरक्षण के लिए प्रयास किये जाने चाहिए। ऊर्जा के वैकल्पिक श्रोत जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा आदि के बारे में संबंधित एजेंसियों से संपर्क कर ग्रामोपयोगी उपकरणों का प्रचार-प्रसार एवं उपयोग प्रोत्साहित किया जा सकता है। बिजली की कम खपत वाले उपकरणों के प्रयोग को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। सप्ताह में एक दिन साइकिल के प्रयोग को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इससे तेल की बचत भी होगी एवं पर्यावरण संरक्षण भी हो सकेगा।

स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रमों में भागीदारी

सरकार की ओर से अनेक स्वस्थ्य संबंधी योजनायें प्रचलन में है। गर्भवती माताओं से लगाकर वृद्धों के इलाज तक एवं टीकाकरण से लगाकर विभिन्न जानलेवा बीमारियों के बचाव तक अनेक कार्यक्रम सरकार द्वारा चलाये जा रहे हैं। इन योजनाओं का लाभ वास्तविक जरुरतों मंदों तक पहुंचे यह काम युवा मण्डलों द्वारा पैदा जागरुकता से हो सकता है। सरकार ने प्रत्येक योजना के क्रियान्वयन के लिए यथासंभव अमला तैनात किया है। यदि स्थानीय युवाओं का सहयोग इस अमले को मिल जाए तो योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर तरीके से हो सकता है। युवा मण्डल को सिर्फ यह करना है कि वह गांव वालों को योजनाओं की जानकारी उपलब्ध करायें और उन्हें शासकीय योजनाओं से लाभ लेने हेतु प्रेरित करें।

शिक्षा के क्षेत्र में

शिक्षा विकास का मूल आधार है। सरकार द्वारा शिक्षा के उन्नयन के लिए प्रयास किया जा रहा है। युवा/महिला मण्डल अपनी पहल के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में यह योगदान दे सकता है –

शत प्रतिशत बच्चों को स्कूल में दाखिले के लिए प्रेरित करें।
स्कूलों में महापुरुषों की जयंतियों एवं दिवसों का आयोजन करके बच्चों को महापुरुषों के व्यक्तित्व एवं कृतित्व से अवगत कराया जा सकता है।
स्कूली बच्चों को यातायात के नियमों एवं नागरिक कर्तव्यों की जानकारी देकर।
स्कूलों में नियमित बाल सभाओं का आयोजन कर बच्चों की प्रतिभा को उभारने का मौका दिया जा सकता है।
स्कूलों में नियमित योग, पी.टी., खेलकूद के कार्यक्रमों का आयोजन स्थानीय सहयोग से करके बच्चों को खेलों के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के संबंध में जानकारी दी जा सकती है।
समय≤ पर बौद्धिक कार्यक्रमों निबंध, भाषण, कविता प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा सकता है।
स्कूली बच्चों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण एवं अच्छी स्वास्थ्यप्रद आदतों के बारे में स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।
पुरानी पुस्तकों एवं खिलौनों से पुस्तक बैंक एवं खिलौना बैंक योजना चलाई जा सकती है।
स्वरोजगार से संबंधित योजनायें

युवा स्वरोजगार संबंधी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करें एवं जरुरतमंदों को उनसे लाभ लेने के लिए प्रेरित करें। रोजगार का आशय सिर्फ सरकारी नौकरी नहीं है। बाजारोन्मुखी अर्थव्यवस्था में जहां रोजगार के नए-नए अवसरों का सृजन हो रहा है, वहीं युवाओं का एक वर्ग बेरोजगारी की समस्या से दो-चार हो रहा है। युवाओं को उपलब्ध अवसरों को पहचानकर आगे बढ़कर पहल करना होगी, साथ ही यह भी समझना होगा कि कड़ी मेहनत ही बेरोजगारी की समस्या का एकमात्र हल है। कृषि के क्षेत्र में नवोन्मेशी पहल करके कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है। कृषि उत्पादों की मांग निरंतर बनी रहती है, अतः युवाओं को इस क्षेत्र में आगे आना चाहिए। माह में एक दिन श्रमदान

युवाओं के बीच श्रम की प्रतिष्ठा को पुनस्र्थापित करना बेहद आवश्यक है। युवाओं को सोचना चाहिए कि उनके आसपास की ऐसी कौन-सी समस्यायें हैं जिन्हें सिर्फ एक या दो दिनों के श्रमदान से हल किया जा सकता है। अगर हम खुले मन से विचार करें तो पायेंगे कि ऐसी अनेक समस्यायें हमारे आप-पास हैं, जिन्हें महज श्रमदान से हल किया जा सकता है।

युवा मण्डल सदस्य पहले समस्या की पहचान करें, पश्चात उसे श्रमदान से हल करने की रणनीति बनायें। इस काम में स्थानीय ग्रामपंचायत का सहयोग अवश्य ही प्राप्त किया जाना चाहिए। श्रमदान के तहत जलस्त्रोतों की सफाई एवं मरम्मत, सोख्ता गढ्ढों का निर्माण, सार्वजनिक भवनों की पुताई, वृक्षारोपण, रास्तों का समतलीकरण खेल मैदानों का रखरखाव, सार्वजनिक संपत्ति का रखरखाव आदि किया जा सकता है। इससे जहां गांव की एक समस्या का समाधान होगा वहीं गांव में युवा मण्डल की प्रतिष्ठा भी बढ़ेगी।

जनकल्याणकारी योजनाओं में सहभागिता

सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्यों आम जन के जीवन को सुखमय बनाना है। यह तभी होगा जब क्रियान्वयन एजेंसी और स्थानीय लोगों के बीच बेहतर समन्वय हो। योजना के मूल उद्देश्यों एवं क्रियान्वयन के तौर-तरीकों के बारे में स्थानीय लोग जागरुक हों। यह जागरुकता युवा मण्डल के सदस्य पैदा कर सकते हैं। युवा मण्डल के सदस्यों को चाहिए कि ग्रामीणों को योजनाओं के बारे में जानकारी दें। आवश्यकतानुसार कागजी कार्यवाही करने में उनकी मदद करें।

कैशलेस अर्थव्यवस्था के लिए जागरुकता

कैशलेस अर्थव्यवस्था संबंधी जागरुकता वर्तमान में प्राथमिकता पर है। डिजिटल भुगतान संबंधी जानकारियां ग्रामीण अंचल में प्रचारित करना एक बड़ी आवश्यकता है। इस संबंध में शासकीय एवं बैंकों की योजनाओं से समन्वय स्थापित कर युवा अधिक से अधिक जागरुकता पैदा कर सकते हैं।

स्थानीय महत्व के कार्य

युवा मण्डल की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरुप कार्यों को हाथ में लेता है अथवा नहीं। स्थानीय संस्कृति, कला, खेल, समस्या आदि की पहचान कर तदनुरुप कार्ययोजना बनाई जाना चाहिये। कार्ययोजना का समयबद्ध क्रियान्वयन एवं स्थानीय ग्राम पंचायत एवं नागरिकों का सहयोग भी सुनिश्चित किया जाना चाहिये। कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण, गरीबी उन्मूलन, व्यक्तिगत स्वच्छता, स्वयंसेविता, युवा नेतृत्व, जीवन कौशल शिक्षा एवं मतदाता जागरुकता जैसे मुद्दे भी युवा मण्डलों को अपने हाथ में लेना चाहिये। नेहरु युवा केन्द्र संगठन एवं युवा मण्डल आन्दोलन का उद्देश्य केवल समस्याओं की पहचान नहीं अपितु समस्याओं के समाधान में युवा मण्डलों की भूमिका सुनिश्चित करना है। युवा/महिला मण्डल गठन/पुनर्गठन, पंजीयन एवं अन्य जानकारी के लिए विकास खण्ड के राष्ट्रीय युवा कोर स्वयंसेवक अथवा कार्यालय नेहरु युवा केन्द्र, उज्जैन से संपर्क करें।

ramkishorkushwah

I'm journalist of kabir kiran news
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